संगम में नौका विहार का आनंद लेते विदेशी सैलानी।

उपर वाला है ना : जीने की चाह ही इंसान को खुश रहने की राह भी दिखता है। अगर मन में हिम्मत और जज्‍बा है तो चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। दर्जनों हाथ उसकी मदद का उठ जाते हैं। संगम के किनारे खड़ी इस दिव्‍यांग बच्‍ची को ही देखिए। एक महिला भक्‍त प्रेमभाव से उसे खाना खिला रही है।

कुंभ मेला में अध्‍यात्‍म और आस्‍था की हर ओर बयार चल रही है। साधु-संन्‍यासियों और कल्पवासियों के शिविर में पूजन-अर्चन और भजन-कीर्तन की धूम है। इसी क्रम में कल्‍पवास शिविर में मानस पाठ करते गया प्रसाद मिश्र व श्रवण करते परिवार के लोग।

त्रिवेणी संगम की गोद में सूर्य देव का विश्राम- यह मनोरम दृश्य संगम घाट किनारे देखने योग्य होता है जब सूरज अहिस्ता आहिस्ता संगम की गोद मे पनाह लेता है। पक्षियों की गवाही में यह नजारा इतना खुबसुरत होता है कि लोग इस शाम को देखने के लिए घंटो इंतजार करते है।

ध्‍यान और उपासना के लिए साधु समय का इंतजार नहीं करते। रात में भी एकाग्र होकर उपासना करते बाबा