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ग्राहक को जेब में पैसे के मुताबिक मिलेगी एलपीजी गैस, सरकार ने दिया विकल्‍प

1 Hour ago

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ने देश के अधिकांश गरीबों के घर में एलपीजी कनेक्शन तो पहुंचा दिया लेकिन इन गरीबों के लिए एक एलपीजी सिलेंडर के लिए 800-900 रुपये का भुगतान करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई एजेंसियों से बात की है और हाल ही में टाटा इनोवेशन ने इसका एक बेहतरीन विकल्प सरकार के सामने पेश किया है जो आने वाले दिनों में एलपीजी बिजनेस में क्रांति ला सकता है। यह सुझाव यह है कि ग्राहक को उसकी जेब के मुताबिक एलपीजी दिया जाए।

अभी 14.2 किलो का बड़ा या 5 किलो का छोटा सिलेंडर ही ग्राहकों को लेना पड़ता है लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा है तो ग्राहक जितना चाहेगा मतलब अगर वह पांच किलो चाहे तो पांच किलो और सात किलो चाहे तो सात किलो एलपीजी दिया जाएगा।

इस बात की जानकारी स्वयं पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को उज्जवला पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर दिया। उन्होंने कहा कि टाटा इनोवेशन के प्रोत्साहन से भुवनेश्वर के आइआइटी में अध्ययनरत एक छात्र ने ऐसी तकनीकी विकसित की है जिससे जो जितना चाहे उतना गैस उसे देने संभव हो सकेगा।

अब यह तेल कंपनियों के ऊपर है कि इस तकनीकी को अपनाये और इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि यह उज्जवला योजना का अगला कदम हो सकता है। हालांकि उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि क्या ग्राहकों के मौजूदा सिलेंडर में ही गैस भरने की व्यवस्था होगी या कोई दूसरी व्यवस्था होगी।

लेकिन उन्होंने यह जरुर कहा कि व्यवस्था ऐसी होगी, जिसमें तेल कंपनियों को नए गैस सिलेंडर तैयार करने की जरुरत न हो। प्रधान की घोषणा के बाद तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी तौर पर इस व्यवस्था को लागू करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर तकनीकी का इस्तेमाल करना होगा।

पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने एक दूसरा संकेत यह दिया कि आने वाले दिनों में देश में बायोमास का इस्तेमाल उज्जवला योजना के तहत दिए जाने वाले गैस सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। यह न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि यह तेल कंपनियों की लागत भी कम आएगी। दरअसल, प्रधान उज्जवला योजना के अगले चरण को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और सोच के बारे में बता रहे थे।

उस संदर्भ में उन्होंने बताया कि गांव-गांव व घर घर एलपीजी पहुंचने से बड़ी संख्या में महिलाओं के पास अतिरिक्त समय बच रहा है। तेल कंपनियों को इन महिलाओं की श्रम-शक्ति के इस्तेमाल की बड़ी योजना बनानी चाहिए। इस अवसर पर प्रधान ने आईआईएम (अहमदाबाद) के पूर्व निदेशक एस के बरुआ ने उज्जवला पर अपना अध्ययन प्रधान को भेंट किया।


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1 Hour ago

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ने देश के अधिकांश गरीबों के घर में एलपीजी कनेक्शन तो पहुंचा दिया लेकिन इन गरीबों के लिए एक एलपीजी सिलेंडर के लिए 800-900 रुपये का भुगतान करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई एजेंसियों से बात की है और हाल ही में टाटा इनोवेशन ने इसका एक बेहतरीन विकल्प सरकार के सामने पेश किया है जो आने वाले दिनों में एलपीजी बिजनेस में क्रांति ला सकता है। यह सुझाव यह है कि ग्राहक को उसकी जेब के मुताबिक एलपीजी दिया जाए।

अभी 14.2 किलो का बड़ा या 5 किलो का छोटा सिलेंडर ही ग्राहकों को लेना पड़ता है लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा है तो ग्राहक जितना चाहेगा मतलब अगर वह पांच किलो चाहे तो पांच किलो और सात किलो चाहे तो सात किलो एलपीजी दिया जाएगा।

इस बात की जानकारी स्वयं पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को उज्जवला पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर दिया। उन्होंने कहा कि टाटा इनोवेशन के प्रोत्साहन से भुवनेश्वर के आइआइटी में अध्ययनरत एक छात्र ने ऐसी तकनीकी विकसित की है जिससे जो जितना चाहे उतना गैस उसे देने संभव हो सकेगा।

अब यह तेल कंपनियों के ऊपर है कि इस तकनीकी को अपनाये और इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि यह उज्जवला योजना का अगला कदम हो सकता है। हालांकि उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि क्या ग्राहकों के मौजूदा सिलेंडर में ही गैस भरने की व्यवस्था होगी या कोई दूसरी व्यवस्था होगी।

लेकिन उन्होंने यह जरुर कहा कि व्यवस्था ऐसी होगी, जिसमें तेल कंपनियों को नए गैस सिलेंडर तैयार करने की जरुरत न हो। प्रधान की घोषणा के बाद तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी तौर पर इस व्यवस्था को लागू करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर तकनीकी का इस्तेमाल करना होगा।

पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने एक दूसरा संकेत यह दिया कि आने वाले दिनों में देश में बायोमास का इस्तेमाल उज्जवला योजना के तहत दिए जाने वाले गैस सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। यह न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि यह तेल कंपनियों की लागत भी कम आएगी। दरअसल, प्रधान उज्जवला योजना के अगले चरण को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और सोच के बारे में बता रहे थे।

उस संदर्भ में उन्होंने बताया कि गांव-गांव व घर घर एलपीजी पहुंचने से बड़ी संख्या में महिलाओं के पास अतिरिक्त समय बच रहा है। तेल कंपनियों को इन महिलाओं की श्रम-शक्ति के इस्तेमाल की बड़ी योजना बनानी चाहिए। इस अवसर पर प्रधान ने आईआईएम (अहमदाबाद) के पूर्व निदेशक एस के बरुआ ने उज्जवला पर अपना अध्ययन प्रधान को भेंट किया।


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प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ने देश के अधिकांश गरीबों के घर में एलपीजी कनेक्शन तो पहुंचा दिया लेकिन इन गरीबों के लिए एक एलपीजी सिलेंडर के लिए 800-900 रुपये का भुगतान करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई एजेंसियों से बात की है और हाल ही में टाटा इनोवेशन ने इसका एक बेहतरीन विकल्प सरकार के सामने पेश किया है जो आने वाले दिनों में एलपीजी बिजनेस में क्रांति ला सकता है। यह सुझाव यह है कि ग्राहक को उसकी जेब के मुताबिक एलपीजी दिया जाए।

अभी 14.2 किलो का बड़ा या 5 किलो का छोटा सिलेंडर ही ग्राहकों को लेना पड़ता है लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा है तो ग्राहक जितना चाहेगा मतलब अगर वह पांच किलो चाहे तो पांच किलो और सात किलो चाहे तो सात किलो एलपीजी दिया जाएगा।

इस बात की जानकारी स्वयं पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को उज्जवला पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर दिया। उन्होंने कहा कि टाटा इनोवेशन के प्रोत्साहन से भुवनेश्वर के आइआइटी में अध्ययनरत एक छात्र ने ऐसी तकनीकी विकसित की है जिससे जो जितना चाहे उतना गैस उसे देने संभव हो सकेगा।

अब यह तेल कंपनियों के ऊपर है कि इस तकनीकी को अपनाये और इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि यह उज्जवला योजना का अगला कदम हो सकता है। हालांकि उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि क्या ग्राहकों के मौजूदा सिलेंडर में ही गैस भरने की व्यवस्था होगी या कोई दूसरी व्यवस्था होगी।

लेकिन उन्होंने यह जरुर कहा कि व्यवस्था ऐसी होगी, जिसमें तेल कंपनियों को नए गैस सिलेंडर तैयार करने की जरुरत न हो। प्रधान की घोषणा के बाद तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी तौर पर इस व्यवस्था को लागू करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर तकनीकी का इस्तेमाल करना होगा।

पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने एक दूसरा संकेत यह दिया कि आने वाले दिनों में देश में बायोमास का इस्तेमाल उज्जवला योजना के तहत दिए जाने वाले गैस सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। यह न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि यह तेल कंपनियों की लागत भी कम आएगी। दरअसल, प्रधान उज्जवला योजना के अगले चरण को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और सोच के बारे में बता रहे थे।

उस संदर्भ में उन्होंने बताया कि गांव-गांव व घर घर एलपीजी पहुंचने से बड़ी संख्या में महिलाओं के पास अतिरिक्त समय बच रहा है। तेल कंपनियों को इन महिलाओं की श्रम-शक्ति के इस्तेमाल की बड़ी योजना बनानी चाहिए। इस अवसर पर प्रधान ने आईआईएम (अहमदाबाद) के पूर्व निदेशक एस के बरुआ ने उज्जवला पर अपना अध्ययन प्रधान को भेंट किया।


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ग्राहक को जेब में पैसे के मुताबिक मिलेगी एलपीजी गैस, सरकार ने दिया विकल्‍प

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प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ने देश के अधिकांश गरीबों के घर में एलपीजी कनेक्शन तो पहुंचा दिया लेकिन इन गरीबों के लिए एक एलपीजी सिलेंडर के लिए 800-900 रुपये का भुगतान करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई एजेंसियों से बात की है और हाल ही में टाटा इनोवेशन ने इसका एक बेहतरीन विकल्प सरकार के सामने पेश किया है जो आने वाले दिनों में एलपीजी बिजनेस में क्रांति ला सकता है। यह सुझाव यह है कि ग्राहक को उसकी जेब के मुताबिक एलपीजी दिया जाए।

अभी 14.2 किलो का बड़ा या 5 किलो का छोटा सिलेंडर ही ग्राहकों को लेना पड़ता है लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा है तो ग्राहक जितना चाहेगा मतलब अगर वह पांच किलो चाहे तो पांच किलो और सात किलो चाहे तो सात किलो एलपीजी दिया जाएगा।

इस बात की जानकारी स्वयं पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को उज्जवला पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर दिया। उन्होंने कहा कि टाटा इनोवेशन के प्रोत्साहन से भुवनेश्वर के आइआइटी में अध्ययनरत एक छात्र ने ऐसी तकनीकी विकसित की है जिससे जो जितना चाहे उतना गैस उसे देने संभव हो सकेगा।

अब यह तेल कंपनियों के ऊपर है कि इस तकनीकी को अपनाये और इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि यह उज्जवला योजना का अगला कदम हो सकता है। हालांकि उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि क्या ग्राहकों के मौजूदा सिलेंडर में ही गैस भरने की व्यवस्था होगी या कोई दूसरी व्यवस्था होगी।

लेकिन उन्होंने यह जरुर कहा कि व्यवस्था ऐसी होगी, जिसमें तेल कंपनियों को नए गैस सिलेंडर तैयार करने की जरुरत न हो। प्रधान की घोषणा के बाद तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी तौर पर इस व्यवस्था को लागू करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर तकनीकी का इस्तेमाल करना होगा।

पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने एक दूसरा संकेत यह दिया कि आने वाले दिनों में देश में बायोमास का इस्तेमाल उज्जवला योजना के तहत दिए जाने वाले गैस सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। यह न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि यह तेल कंपनियों की लागत भी कम आएगी। दरअसल, प्रधान उज्जवला योजना के अगले चरण को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और सोच के बारे में बता रहे थे।

उस संदर्भ में उन्होंने बताया कि गांव-गांव व घर घर एलपीजी पहुंचने से बड़ी संख्या में महिलाओं के पास अतिरिक्त समय बच रहा है। तेल कंपनियों को इन महिलाओं की श्रम-शक्ति के इस्तेमाल की बड़ी योजना बनानी चाहिए। इस अवसर पर प्रधान ने आईआईएम (अहमदाबाद) के पूर्व निदेशक एस के बरुआ ने उज्जवला पर अपना अध्ययन प्रधान को भेंट किया।


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डिजिटल फार्मिंग से भरेगा दुनिया का पेट, बदल रही तकनीक, आधुनिक हो रहे किसान

1 Hour ago

तेजी से बढ़ती आबादी और खराब होती आबोहवा ने दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ इस बात की चिंता से दो चार हो रहे हैं कि अगर इसी तरह मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती रही, पानी की कमी होती रही या जलवायु परिवर्तन के चलते कम और खराब गुणवत्ता वाले खाद्यान्न उत्पादित होते रहे तो लोगों का कैसे पेट भरा जाए।

इसी क्रम में अब विशेषज्ञों ने ड़िजिटल फार्मिंग को इन सब मर्जों की एक दवा मानी है। उनका मानना है कि इसी तरीके से टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। स्वत: काम करने वाले रोबोट, ड्रोन, जीपीएस प्रणाली, अत्याधुनिक विज्ञान सहित दुनिया भर के किसान नई तकनीकों के इस्तेमाल से कम लागत में स्मार्ट खेती के तरीके से इस दिशा में कदम भी बढ़ा चुके हैं। भारत सहित अमेरिका, हंगरी, चीन और अफ्रीका के किसान टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आधुनिक किसान और कृषि शिक्षा
पुराने जमाने में खेती-किसानी को ऐसा पेशा माना जाता रहा है जिसमें वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्वत: स्थानांतरित होता जाता था। अब हालत अलहदा है। आज के किसान डिजिटल ज्ञान और कौशल से लैस हैं। पिछले 30 साल में दुनिया भर में टिकाऊ खेती को लेकर हुई खोजें महज आर्थिक लाभ लेने से नहीं हुईं बल्कि इसने कृषि को उच्च शिक्षा के दायरे में भी शामिल किया। अमेरिका के कॉलेज और विश्वविद्यालय टिकाऊ खेती के 140 कोर्स पढ़ा रहे हैं। यह बताता है कि किस तरह से युवा पीढ़ी हमारे खाद्य सिस्टम को स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने को लेकर सचेष्ट है।

धन और समय की बचत
डिजिटल तकनीक खेती और उसके तौर-तरीकों को तेजी से बदल रही है। डाटा, पूर्वानुमान का विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और समग्र खेती प्रबंधन ने किसानों का समय तो बचाया ही है, परंपरागत तौर से की जाने वाली उनकी खेती की लागत भी कम की है। इससे खेती में अप्रत्याशित सटीकता और कुशलता आई है।

तकनीक की तेजी
सेटेलाइट और ड्रोन खेतिहर किसानों को बता रहे हैं कि वे जमीनी स्तर पर अपनी फसलों का प्रबंधन कैसे करें। इनकी तस्वीरों से वे सही आकलन करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब, कैसे और किस फसल की बुआई करनी है। सेटेलाइट से एकत्र आंकड़े स्मार्ट खेती में संभावनाओं का नया द्वार खोला है।

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1 Hour ago

तेजी से बढ़ती आबादी और खराब होती आबोहवा ने दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ इस बात की चिंता से दो चार हो रहे हैं कि अगर इसी तरह मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती रही, पानी की कमी होती रही या जलवायु परिवर्तन के चलते कम और खराब गुणवत्ता वाले खाद्यान्न उत्पादित होते रहे तो लोगों का कैसे पेट भरा जाए।

इसी क्रम में अब विशेषज्ञों ने ड़िजिटल फार्मिंग को इन सब मर्जों की एक दवा मानी है। उनका मानना है कि इसी तरीके से टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। स्वत: काम करने वाले रोबोट, ड्रोन, जीपीएस प्रणाली, अत्याधुनिक विज्ञान सहित दुनिया भर के किसान नई तकनीकों के इस्तेमाल से कम लागत में स्मार्ट खेती के तरीके से इस दिशा में कदम भी बढ़ा चुके हैं। भारत सहित अमेरिका, हंगरी, चीन और अफ्रीका के किसान टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आधुनिक किसान और कृषि शिक्षा
पुराने जमाने में खेती-किसानी को ऐसा पेशा माना जाता रहा है जिसमें वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्वत: स्थानांतरित होता जाता था। अब हालत अलहदा है। आज के किसान डिजिटल ज्ञान और कौशल से लैस हैं। पिछले 30 साल में दुनिया भर में टिकाऊ खेती को लेकर हुई खोजें महज आर्थिक लाभ लेने से नहीं हुईं बल्कि इसने कृषि को उच्च शिक्षा के दायरे में भी शामिल किया। अमेरिका के कॉलेज और विश्वविद्यालय टिकाऊ खेती के 140 कोर्स पढ़ा रहे हैं। यह बताता है कि किस तरह से युवा पीढ़ी हमारे खाद्य सिस्टम को स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने को लेकर सचेष्ट है।

धन और समय की बचत
डिजिटल तकनीक खेती और उसके तौर-तरीकों को तेजी से बदल रही है। डाटा, पूर्वानुमान का विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और समग्र खेती प्रबंधन ने किसानों का समय तो बचाया ही है, परंपरागत तौर से की जाने वाली उनकी खेती की लागत भी कम की है। इससे खेती में अप्रत्याशित सटीकता और कुशलता आई है।

तकनीक की तेजी
सेटेलाइट और ड्रोन खेतिहर किसानों को बता रहे हैं कि वे जमीनी स्तर पर अपनी फसलों का प्रबंधन कैसे करें। इनकी तस्वीरों से वे सही आकलन करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब, कैसे और किस फसल की बुआई करनी है। सेटेलाइट से एकत्र आंकड़े स्मार्ट खेती में संभावनाओं का नया द्वार खोला है।

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डिजिटल फार्मिंग से भरेगा दुनिया का पेट, बदल रही तकनीक, आधुनिक हो रहे किसान

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तेजी से बढ़ती आबादी और खराब होती आबोहवा ने दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ इस बात की चिंता से दो चार हो रहे हैं कि अगर इसी तरह मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती रही, पानी की कमी होती रही या जलवायु परिवर्तन के चलते कम और खराब गुणवत्ता वाले खाद्यान्न उत्पादित होते रहे तो लोगों का कैसे पेट भरा जाए।

इसी क्रम में अब विशेषज्ञों ने ड़िजिटल फार्मिंग को इन सब मर्जों की एक दवा मानी है। उनका मानना है कि इसी तरीके से टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। स्वत: काम करने वाले रोबोट, ड्रोन, जीपीएस प्रणाली, अत्याधुनिक विज्ञान सहित दुनिया भर के किसान नई तकनीकों के इस्तेमाल से कम लागत में स्मार्ट खेती के तरीके से इस दिशा में कदम भी बढ़ा चुके हैं। भारत सहित अमेरिका, हंगरी, चीन और अफ्रीका के किसान टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आधुनिक किसान और कृषि शिक्षा
पुराने जमाने में खेती-किसानी को ऐसा पेशा माना जाता रहा है जिसमें वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्वत: स्थानांतरित होता जाता था। अब हालत अलहदा है। आज के किसान डिजिटल ज्ञान और कौशल से लैस हैं। पिछले 30 साल में दुनिया भर में टिकाऊ खेती को लेकर हुई खोजें महज आर्थिक लाभ लेने से नहीं हुईं बल्कि इसने कृषि को उच्च शिक्षा के दायरे में भी शामिल किया। अमेरिका के कॉलेज और विश्वविद्यालय टिकाऊ खेती के 140 कोर्स पढ़ा रहे हैं। यह बताता है कि किस तरह से युवा पीढ़ी हमारे खाद्य सिस्टम को स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने को लेकर सचेष्ट है।

धन और समय की बचत
डिजिटल तकनीक खेती और उसके तौर-तरीकों को तेजी से बदल रही है। डाटा, पूर्वानुमान का विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और समग्र खेती प्रबंधन ने किसानों का समय तो बचाया ही है, परंपरागत तौर से की जाने वाली उनकी खेती की लागत भी कम की है। इससे खेती में अप्रत्याशित सटीकता और कुशलता आई है।

तकनीक की तेजी
सेटेलाइट और ड्रोन खेतिहर किसानों को बता रहे हैं कि वे जमीनी स्तर पर अपनी फसलों का प्रबंधन कैसे करें। इनकी तस्वीरों से वे सही आकलन करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब, कैसे और किस फसल की बुआई करनी है। सेटेलाइट से एकत्र आंकड़े स्मार्ट खेती में संभावनाओं का नया द्वार खोला है।

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डिजिटल फार्मिंग से भरेगा दुनिया का पेट, बदल रही तकनीक, आधुनिक हो रहे किसान

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तेजी से बढ़ती आबादी और खराब होती आबोहवा ने दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ इस बात की चिंता से दो चार हो रहे हैं कि अगर इसी तरह मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती रही, पानी की कमी होती रही या जलवायु परिवर्तन के चलते कम और खराब गुणवत्ता वाले खाद्यान्न उत्पादित होते रहे तो लोगों का कैसे पेट भरा जाए।

इसी क्रम में अब विशेषज्ञों ने ड़िजिटल फार्मिंग को इन सब मर्जों की एक दवा मानी है। उनका मानना है कि इसी तरीके से टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। स्वत: काम करने वाले रोबोट, ड्रोन, जीपीएस प्रणाली, अत्याधुनिक विज्ञान सहित दुनिया भर के किसान नई तकनीकों के इस्तेमाल से कम लागत में स्मार्ट खेती के तरीके से इस दिशा में कदम भी बढ़ा चुके हैं। भारत सहित अमेरिका, हंगरी, चीन और अफ्रीका के किसान टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आधुनिक किसान और कृषि शिक्षा
पुराने जमाने में खेती-किसानी को ऐसा पेशा माना जाता रहा है जिसमें वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्वत: स्थानांतरित होता जाता था। अब हालत अलहदा है। आज के किसान डिजिटल ज्ञान और कौशल से लैस हैं। पिछले 30 साल में दुनिया भर में टिकाऊ खेती को लेकर हुई खोजें महज आर्थिक लाभ लेने से नहीं हुईं बल्कि इसने कृषि को उच्च शिक्षा के दायरे में भी शामिल किया। अमेरिका के कॉलेज और विश्वविद्यालय टिकाऊ खेती के 140 कोर्स पढ़ा रहे हैं। यह बताता है कि किस तरह से युवा पीढ़ी हमारे खाद्य सिस्टम को स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने को लेकर सचेष्ट है।

धन और समय की बचत
डिजिटल तकनीक खेती और उसके तौर-तरीकों को तेजी से बदल रही है। डाटा, पूर्वानुमान का विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और समग्र खेती प्रबंधन ने किसानों का समय तो बचाया ही है, परंपरागत तौर से की जाने वाली उनकी खेती की लागत भी कम की है। इससे खेती में अप्रत्याशित सटीकता और कुशलता आई है।

तकनीक की तेजी
सेटेलाइट और ड्रोन खेतिहर किसानों को बता रहे हैं कि वे जमीनी स्तर पर अपनी फसलों का प्रबंधन कैसे करें। इनकी तस्वीरों से वे सही आकलन करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब, कैसे और किस फसल की बुआई करनी है। सेटेलाइट से एकत्र आंकड़े स्मार्ट खेती में संभावनाओं का नया द्वार खोला है।

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थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन टिकेश्वरी ने कभी मनचलों को सिखाया था ऐसा सबक

1 Hour ago

दो साल पहले की बात है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्कूल से छात्रा टिकेश्वरी अपने घर लौट रही थी। साइकिल से घर जा रही छात्रा को तीन मनचलों ने रास्ते में रोका। उन्हें लगा ये नाजुक सी लड़की उनका क्या बिगाड़ पाएगी, लेकिन पलक झपकते ही दांव पलट गया और टिकेश्वरी ने तीनों मवालियों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। 16 साल की इस लड़की की बहादुरी के खूब चर्चे भी हुए थे। अब इसी लड़की ने थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में बतौर खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मैडल जीता है।

आत्मरक्षा में माहिर, लड़कियों के लिए बनीं रोल मॉडल

तीन फरवरी को गोवा में आयोजित थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में टिकेश्वरी ने भारत की ही सुनीता को 3-0 से हराकर 44 किलो वजन वर्ग में वर्ल्ड टाइटल अपने नाम किया। टिकेश्वरी की कहानी संघर्ष और जीत के कई छोटे-छोटे किस्सों से बनी है। रायपुर की रहने वाली टिकेश्वरी को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह लड़की आत्मरक्षा में इस कदर माहिर है कि एक-दो नहीं बल्कि कई लड़कों को अकेले ही सबक सिखा सकती है। दो साल पहले जो घटना टिकेश्वरी के साथ हुई थी, उस पर मीडिया में भी उनकी इस हिम्मत को सराहा गया था। उस समय टिकेश्वरी लड़कियों के लिए रोल मॉडल के रूप में उभरी थीं। बचपन से ही खेलों में रूचि रखने वाली टिकेश्वरी क्रिकेट और मार्सल आर्ट की भी अच्छी खिलाड़ी हैं। टिकेश्वरी के बुलंद इरादों की बदौलत अब वह खेल के क्षेत्र में देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

मां करती हैं मजदूरी, संघर्षों से लिख रही सफलता की कहानी

टिकेश्वरी की इस सफलता में उनकी मां की भूमिका सबसे बड़ी है। इसके बाद टिकेश्वरी की लगन और कोच की मेहनत ने उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में उभारा है। 4 बहनों में सबसे बड़ी टिकेश्वरी की मां नीरा साहू आरा मिल में मजदूर करती हैं। टिकेश्वरी के पिता सुरेश साहू का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। टिकेश्वरी ने कोच अनिस मेमन के मार्गदर्शन में कराते, म्यू थाई, योग व थाई बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया है। वे राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता सहित मार्शल आर्ट की विभिन्न् ओपन प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं।

दूसरों को भी दे रहीं खेलों का प्रशिक्षण ट्रेनिंग

अक्सर लोग इस बात की शिकायत करते हैं कि पारिवारिक में आर्थिक कमजोरी की वजह से वे कोई मुकाम हासिल नहीं कर पाए, लेकिन टिकेश्वरी ने अभावों से लड़ना सीखा और अब देश में खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। रायपुर के दुर्गा कॉलेज में स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत टिकेश्वरी यहां श्री गुजराती स्कूल देवेंद्र नगर रायपुर में खेल प्रशिक्षक के तौर पर भी काम करती हैं। टिकेश्वरी का कहना है कि मैं जीवन की चुनौतियों को खेल की तरह देखती हूं। खेल के मैदान में जो संघर्ष दिखता है, उसी तरह जीवन में भी कई चुनौतियां आती हैं। इनका मुकाबला खेल भावना मन में रखकर करती हूं और आगे बढ़ने के लिए रास्ते बनते जाते हैं।


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1 Hour ago

दो साल पहले की बात है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्कूल से छात्रा टिकेश्वरी अपने घर लौट रही थी। साइकिल से घर जा रही छात्रा को तीन मनचलों ने रास्ते में रोका। उन्हें लगा ये नाजुक सी लड़की उनका क्या बिगाड़ पाएगी, लेकिन पलक झपकते ही दांव पलट गया और टिकेश्वरी ने तीनों मवालियों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। 16 साल की इस लड़की की बहादुरी के खूब चर्चे भी हुए थे। अब इसी लड़की ने थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में बतौर खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मैडल जीता है।

आत्मरक्षा में माहिर, लड़कियों के लिए बनीं रोल मॉडल

तीन फरवरी को गोवा में आयोजित थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में टिकेश्वरी ने भारत की ही सुनीता को 3-0 से हराकर 44 किलो वजन वर्ग में वर्ल्ड टाइटल अपने नाम किया। टिकेश्वरी की कहानी संघर्ष और जीत के कई छोटे-छोटे किस्सों से बनी है। रायपुर की रहने वाली टिकेश्वरी को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह लड़की आत्मरक्षा में इस कदर माहिर है कि एक-दो नहीं बल्कि कई लड़कों को अकेले ही सबक सिखा सकती है। दो साल पहले जो घटना टिकेश्वरी के साथ हुई थी, उस पर मीडिया में भी उनकी इस हिम्मत को सराहा गया था। उस समय टिकेश्वरी लड़कियों के लिए रोल मॉडल के रूप में उभरी थीं। बचपन से ही खेलों में रूचि रखने वाली टिकेश्वरी क्रिकेट और मार्सल आर्ट की भी अच्छी खिलाड़ी हैं। टिकेश्वरी के बुलंद इरादों की बदौलत अब वह खेल के क्षेत्र में देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

मां करती हैं मजदूरी, संघर्षों से लिख रही सफलता की कहानी

टिकेश्वरी की इस सफलता में उनकी मां की भूमिका सबसे बड़ी है। इसके बाद टिकेश्वरी की लगन और कोच की मेहनत ने उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में उभारा है। 4 बहनों में सबसे बड़ी टिकेश्वरी की मां नीरा साहू आरा मिल में मजदूर करती हैं। टिकेश्वरी के पिता सुरेश साहू का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। टिकेश्वरी ने कोच अनिस मेमन के मार्गदर्शन में कराते, म्यू थाई, योग व थाई बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया है। वे राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता सहित मार्शल आर्ट की विभिन्न् ओपन प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं।

दूसरों को भी दे रहीं खेलों का प्रशिक्षण ट्रेनिंग

अक्सर लोग इस बात की शिकायत करते हैं कि पारिवारिक में आर्थिक कमजोरी की वजह से वे कोई मुकाम हासिल नहीं कर पाए, लेकिन टिकेश्वरी ने अभावों से लड़ना सीखा और अब देश में खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। रायपुर के दुर्गा कॉलेज में स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत टिकेश्वरी यहां श्री गुजराती स्कूल देवेंद्र नगर रायपुर में खेल प्रशिक्षक के तौर पर भी काम करती हैं। टिकेश्वरी का कहना है कि मैं जीवन की चुनौतियों को खेल की तरह देखती हूं। खेल के मैदान में जो संघर्ष दिखता है, उसी तरह जीवन में भी कई चुनौतियां आती हैं। इनका मुकाबला खेल भावना मन में रखकर करती हूं और आगे बढ़ने के लिए रास्ते बनते जाते हैं।


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थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन टिकेश्वरी ने कभी मनचलों को सिखाया था ऐसा सबक

1 Hour ago

दो साल पहले की बात है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्कूल से छात्रा टिकेश्वरी अपने घर लौट रही थी। साइकिल से घर जा रही छात्रा को तीन मनचलों ने रास्ते में रोका। उन्हें लगा ये नाजुक सी लड़की उनका क्या बिगाड़ पाएगी, लेकिन पलक झपकते ही दांव पलट गया और टिकेश्वरी ने तीनों मवालियों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। 16 साल की इस लड़की की बहादुरी के खूब चर्चे भी हुए थे। अब इसी लड़की ने थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में बतौर खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मैडल जीता है।

आत्मरक्षा में माहिर, लड़कियों के लिए बनीं रोल मॉडल

तीन फरवरी को गोवा में आयोजित थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में टिकेश्वरी ने भारत की ही सुनीता को 3-0 से हराकर 44 किलो वजन वर्ग में वर्ल्ड टाइटल अपने नाम किया। टिकेश्वरी की कहानी संघर्ष और जीत के कई छोटे-छोटे किस्सों से बनी है। रायपुर की रहने वाली टिकेश्वरी को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह लड़की आत्मरक्षा में इस कदर माहिर है कि एक-दो नहीं बल्कि कई लड़कों को अकेले ही सबक सिखा सकती है। दो साल पहले जो घटना टिकेश्वरी के साथ हुई थी, उस पर मीडिया में भी उनकी इस हिम्मत को सराहा गया था। उस समय टिकेश्वरी लड़कियों के लिए रोल मॉडल के रूप में उभरी थीं। बचपन से ही खेलों में रूचि रखने वाली टिकेश्वरी क्रिकेट और मार्सल आर्ट की भी अच्छी खिलाड़ी हैं। टिकेश्वरी के बुलंद इरादों की बदौलत अब वह खेल के क्षेत्र में देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

मां करती हैं मजदूरी, संघर्षों से लिख रही सफलता की कहानी

टिकेश्वरी की इस सफलता में उनकी मां की भूमिका सबसे बड़ी है। इसके बाद टिकेश्वरी की लगन और कोच की मेहनत ने उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में उभारा है। 4 बहनों में सबसे बड़ी टिकेश्वरी की मां नीरा साहू आरा मिल में मजदूर करती हैं। टिकेश्वरी के पिता सुरेश साहू का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। टिकेश्वरी ने कोच अनिस मेमन के मार्गदर्शन में कराते, म्यू थाई, योग व थाई बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया है। वे राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता सहित मार्शल आर्ट की विभिन्न् ओपन प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं।

दूसरों को भी दे रहीं खेलों का प्रशिक्षण ट्रेनिंग

अक्सर लोग इस बात की शिकायत करते हैं कि पारिवारिक में आर्थिक कमजोरी की वजह से वे कोई मुकाम हासिल नहीं कर पाए, लेकिन टिकेश्वरी ने अभावों से लड़ना सीखा और अब देश में खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। रायपुर के दुर्गा कॉलेज में स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत टिकेश्वरी यहां श्री गुजराती स्कूल देवेंद्र नगर रायपुर में खेल प्रशिक्षक के तौर पर भी काम करती हैं। टिकेश्वरी का कहना है कि मैं जीवन की चुनौतियों को खेल की तरह देखती हूं। खेल के मैदान में जो संघर्ष दिखता है, उसी तरह जीवन में भी कई चुनौतियां आती हैं। इनका मुकाबला खेल भावना मन में रखकर करती हूं और आगे बढ़ने के लिए रास्ते बनते जाते हैं।


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थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन टिकेश्वरी ने कभी मनचलों को सिखाया था ऐसा सबक

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दो साल पहले की बात है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्कूल से छात्रा टिकेश्वरी अपने घर लौट रही थी। साइकिल से घर जा रही छात्रा को तीन मनचलों ने रास्ते में रोका। उन्हें लगा ये नाजुक सी लड़की उनका क्या बिगाड़ पाएगी, लेकिन पलक झपकते ही दांव पलट गया और टिकेश्वरी ने तीनों मवालियों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। 16 साल की इस लड़की की बहादुरी के खूब चर्चे भी हुए थे। अब इसी लड़की ने थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में बतौर खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मैडल जीता है।

आत्मरक्षा में माहिर, लड़कियों के लिए बनीं रोल मॉडल

तीन फरवरी को गोवा में आयोजित थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में टिकेश्वरी ने भारत की ही सुनीता को 3-0 से हराकर 44 किलो वजन वर्ग में वर्ल्ड टाइटल अपने नाम किया। टिकेश्वरी की कहानी संघर्ष और जीत के कई छोटे-छोटे किस्सों से बनी है। रायपुर की रहने वाली टिकेश्वरी को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह लड़की आत्मरक्षा में इस कदर माहिर है कि एक-दो नहीं बल्कि कई लड़कों को अकेले ही सबक सिखा सकती है। दो साल पहले जो घटना टिकेश्वरी के साथ हुई थी, उस पर मीडिया में भी उनकी इस हिम्मत को सराहा गया था। उस समय टिकेश्वरी लड़कियों के लिए रोल मॉडल के रूप में उभरी थीं। बचपन से ही खेलों में रूचि रखने वाली टिकेश्वरी क्रिकेट और मार्सल आर्ट की भी अच्छी खिलाड़ी हैं। टिकेश्वरी के बुलंद इरादों की बदौलत अब वह खेल के क्षेत्र में देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

मां करती हैं मजदूरी, संघर्षों से लिख रही सफलता की कहानी

टिकेश्वरी की इस सफलता में उनकी मां की भूमिका सबसे बड़ी है। इसके बाद टिकेश्वरी की लगन और कोच की मेहनत ने उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में उभारा है। 4 बहनों में सबसे बड़ी टिकेश्वरी की मां नीरा साहू आरा मिल में मजदूर करती हैं। टिकेश्वरी के पिता सुरेश साहू का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। टिकेश्वरी ने कोच अनिस मेमन के मार्गदर्शन में कराते, म्यू थाई, योग व थाई बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया है। वे राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता सहित मार्शल आर्ट की विभिन्न् ओपन प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं।

दूसरों को भी दे रहीं खेलों का प्रशिक्षण ट्रेनिंग

अक्सर लोग इस बात की शिकायत करते हैं कि पारिवारिक में आर्थिक कमजोरी की वजह से वे कोई मुकाम हासिल नहीं कर पाए, लेकिन टिकेश्वरी ने अभावों से लड़ना सीखा और अब देश में खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। रायपुर के दुर्गा कॉलेज में स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत टिकेश्वरी यहां श्री गुजराती स्कूल देवेंद्र नगर रायपुर में खेल प्रशिक्षक के तौर पर भी काम करती हैं। टिकेश्वरी का कहना है कि मैं जीवन की चुनौतियों को खेल की तरह देखती हूं। खेल के मैदान में जो संघर्ष दिखता है, उसी तरह जीवन में भी कई चुनौतियां आती हैं। इनका मुकाबला खेल भावना मन में रखकर करती हूं और आगे बढ़ने के लिए रास्ते बनते जाते हैं।


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शोधार्थियों को फेलोशिप में बढोत्तरी को लेकर अब नहीं करना पड़ेगा आंदोलन

1 Hour ago

शोध के लिए देश में बेहतर माहौल बनाने में जुटी सरकार ने शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर शोधार्थियों को अब आंदोलन नहीं करना होगा, बल्कि इसमें हर साल खुद ही बढोत्तरी हो जाएगी। इसे लेकर एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा। फिलहाल इसे लेकर सरकार ने वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के सचिव जीसी मुरमू की अध्यक्षता में एक दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी गठित कर दी है। जिसने अपना काम भी शुरू कर दिया है।

फेलोशिप राशि की हर साल होगी समीक्षा, चार हफ्ते में देगी रिपोर्ट

सरकार ने यह कदम फेलोशिप राशि में बढोत्तरी के हफ्ते भर के भीतर उठाया है, जिसमें फेलोशिप की राशि में करीब 35 फीसद तक बढ़ोत्तरी की गई है। हालांकि सरकार ने यह फैसला शोधार्थियों की ओर से चलाए गए लंबे आंदोलन के बाद लिया था। इस बीच गठित की गई कमेटी को चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

बनेगा मजबूत तंत्र, सरकार ने गठित की दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी

कमेटी में जिन मंत्रालयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, उनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को इसका सह-अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा इस कमेटी में सात अन्य सदस्य भी बनाए गए है। इनमें डायरेक्टर सीएसआईआर, डायरेक्टर आईसीएआर, चेयरमैन यूजीसी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वित्त सलाहकार, जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार, आईआईटी दिल्ली के डायेक्टर प्रोफेसर वी रामगोपाल राव और सचिव यूजीसी को शामिल किया गया है।

अभी शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर देश को कोई भी व्यवस्था नहीं है। हाल ही में हुई यह बढ़ोत्तरी चार सालों के बाद की गई थी। शोधर्थियों की ओर से फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी का सालाना आंकलन करने की भी मांग की गई थी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक फेलोशिप में बढ़ोत्तरी के जिस फार्मूले पर काम किया जा रहा है, उसके तहत शोधार्धियों के प्रदर्शन को भी जांचा जाएगा।

अभी शोध के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पंजीकृत है, जो लंबे समय से एक ही शोध में लगे है, लेकिन अभी तक कोई वह पूरा नहीं हो सका है। नई योजना के तहत शोधार्थियों अब शोध को ज्यादा लंबा लटका नहीं सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे शोध के क्षेत्र में भी तेजी आएगी।


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शोध के लिए देश में बेहतर माहौल बनाने में जुटी सरकार ने शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर शोधार्थियों को अब आंदोलन नहीं करना होगा, बल्कि इसमें हर साल खुद ही बढोत्तरी हो जाएगी। इसे लेकर एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा। फिलहाल इसे लेकर सरकार ने वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के सचिव जीसी मुरमू की अध्यक्षता में एक दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी गठित कर दी है। जिसने अपना काम भी शुरू कर दिया है।

फेलोशिप राशि की हर साल होगी समीक्षा, चार हफ्ते में देगी रिपोर्ट

सरकार ने यह कदम फेलोशिप राशि में बढोत्तरी के हफ्ते भर के भीतर उठाया है, जिसमें फेलोशिप की राशि में करीब 35 फीसद तक बढ़ोत्तरी की गई है। हालांकि सरकार ने यह फैसला शोधार्थियों की ओर से चलाए गए लंबे आंदोलन के बाद लिया था। इस बीच गठित की गई कमेटी को चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

बनेगा मजबूत तंत्र, सरकार ने गठित की दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी

कमेटी में जिन मंत्रालयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, उनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को इसका सह-अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा इस कमेटी में सात अन्य सदस्य भी बनाए गए है। इनमें डायरेक्टर सीएसआईआर, डायरेक्टर आईसीएआर, चेयरमैन यूजीसी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वित्त सलाहकार, जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार, आईआईटी दिल्ली के डायेक्टर प्रोफेसर वी रामगोपाल राव और सचिव यूजीसी को शामिल किया गया है।

अभी शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर देश को कोई भी व्यवस्था नहीं है। हाल ही में हुई यह बढ़ोत्तरी चार सालों के बाद की गई थी। शोधर्थियों की ओर से फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी का सालाना आंकलन करने की भी मांग की गई थी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक फेलोशिप में बढ़ोत्तरी के जिस फार्मूले पर काम किया जा रहा है, उसके तहत शोधार्धियों के प्रदर्शन को भी जांचा जाएगा।

अभी शोध के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पंजीकृत है, जो लंबे समय से एक ही शोध में लगे है, लेकिन अभी तक कोई वह पूरा नहीं हो सका है। नई योजना के तहत शोधार्थियों अब शोध को ज्यादा लंबा लटका नहीं सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे शोध के क्षेत्र में भी तेजी आएगी।


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शोधार्थियों को फेलोशिप में बढोत्तरी को लेकर अब नहीं करना पड़ेगा आंदोलन

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शोध के लिए देश में बेहतर माहौल बनाने में जुटी सरकार ने शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर शोधार्थियों को अब आंदोलन नहीं करना होगा, बल्कि इसमें हर साल खुद ही बढोत्तरी हो जाएगी। इसे लेकर एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा। फिलहाल इसे लेकर सरकार ने वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के सचिव जीसी मुरमू की अध्यक्षता में एक दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी गठित कर दी है। जिसने अपना काम भी शुरू कर दिया है।

फेलोशिप राशि की हर साल होगी समीक्षा, चार हफ्ते में देगी रिपोर्ट

सरकार ने यह कदम फेलोशिप राशि में बढोत्तरी के हफ्ते भर के भीतर उठाया है, जिसमें फेलोशिप की राशि में करीब 35 फीसद तक बढ़ोत्तरी की गई है। हालांकि सरकार ने यह फैसला शोधार्थियों की ओर से चलाए गए लंबे आंदोलन के बाद लिया था। इस बीच गठित की गई कमेटी को चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

बनेगा मजबूत तंत्र, सरकार ने गठित की दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी

कमेटी में जिन मंत्रालयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, उनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को इसका सह-अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा इस कमेटी में सात अन्य सदस्य भी बनाए गए है। इनमें डायरेक्टर सीएसआईआर, डायरेक्टर आईसीएआर, चेयरमैन यूजीसी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वित्त सलाहकार, जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार, आईआईटी दिल्ली के डायेक्टर प्रोफेसर वी रामगोपाल राव और सचिव यूजीसी को शामिल किया गया है।

अभी शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर देश को कोई भी व्यवस्था नहीं है। हाल ही में हुई यह बढ़ोत्तरी चार सालों के बाद की गई थी। शोधर्थियों की ओर से फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी का सालाना आंकलन करने की भी मांग की गई थी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक फेलोशिप में बढ़ोत्तरी के जिस फार्मूले पर काम किया जा रहा है, उसके तहत शोधार्धियों के प्रदर्शन को भी जांचा जाएगा।

अभी शोध के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पंजीकृत है, जो लंबे समय से एक ही शोध में लगे है, लेकिन अभी तक कोई वह पूरा नहीं हो सका है। नई योजना के तहत शोधार्थियों अब शोध को ज्यादा लंबा लटका नहीं सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे शोध के क्षेत्र में भी तेजी आएगी।


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शोधार्थियों को फेलोशिप में बढोत्तरी को लेकर अब नहीं करना पड़ेगा आंदोलन

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शोध के लिए देश में बेहतर माहौल बनाने में जुटी सरकार ने शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर शोधार्थियों को अब आंदोलन नहीं करना होगा, बल्कि इसमें हर साल खुद ही बढोत्तरी हो जाएगी। इसे लेकर एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा। फिलहाल इसे लेकर सरकार ने वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के सचिव जीसी मुरमू की अध्यक्षता में एक दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी गठित कर दी है। जिसने अपना काम भी शुरू कर दिया है।

फेलोशिप राशि की हर साल होगी समीक्षा, चार हफ्ते में देगी रिपोर्ट

सरकार ने यह कदम फेलोशिप राशि में बढोत्तरी के हफ्ते भर के भीतर उठाया है, जिसमें फेलोशिप की राशि में करीब 35 फीसद तक बढ़ोत्तरी की गई है। हालांकि सरकार ने यह फैसला शोधार्थियों की ओर से चलाए गए लंबे आंदोलन के बाद लिया था। इस बीच गठित की गई कमेटी को चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

बनेगा मजबूत तंत्र, सरकार ने गठित की दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी

कमेटी में जिन मंत्रालयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, उनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को इसका सह-अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा इस कमेटी में सात अन्य सदस्य भी बनाए गए है। इनमें डायरेक्टर सीएसआईआर, डायरेक्टर आईसीएआर, चेयरमैन यूजीसी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वित्त सलाहकार, जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार, आईआईटी दिल्ली के डायेक्टर प्रोफेसर वी रामगोपाल राव और सचिव यूजीसी को शामिल किया गया है।

अभी शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर देश को कोई भी व्यवस्था नहीं है। हाल ही में हुई यह बढ़ोत्तरी चार सालों के बाद की गई थी। शोधर्थियों की ओर से फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी का सालाना आंकलन करने की भी मांग की गई थी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक फेलोशिप में बढ़ोत्तरी के जिस फार्मूले पर काम किया जा रहा है, उसके तहत शोधार्धियों के प्रदर्शन को भी जांचा जाएगा।

अभी शोध के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पंजीकृत है, जो लंबे समय से एक ही शोध में लगे है, लेकिन अभी तक कोई वह पूरा नहीं हो सका है। नई योजना के तहत शोधार्थियों अब शोध को ज्यादा लंबा लटका नहीं सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे शोध के क्षेत्र में भी तेजी आएगी।


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एयरपोर्ट पर शक्ति कपूर से मिले क्रिकेटर युवराज सिंह, ये स्टार्स भी दिखे, देखें तस्वीरें

1 Hour ago

मुंबई एयरपोर्ट पर आज क्रिकेटर युवराज सिंह और अभिनेता शक्ति कपूर जब एक दूसरे से मिले तो किसी बिछड़े दोस्त की तरह मिले। दरअसल, दोनों अपनी फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट पहुंचे थे जहां इन दोनों का आमना-सामना हुआ। फोटोग्राफरों ने इन पलों को कैमरे में कैद कर लिया।


अभिनेता वरुण धवन भी मुंबई एयरपोर्ट पर नज़र आये। वरुण इन दिनों अपनी फ़िल्म कलंक की शूटिंग कर रहे हैं।

अभिनेत्री नुशरत भरुचा भी मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट की गयीं।

अभिनेत्री सुष्मिता सेन अपनी दोनों बेटियों और ब्वॉयफ्रेंड रोहमन शॉल संग कुछ इस अंदाज़ में दिखीं।

एयरपोर्ट पर शक्ति कपूर से मिले क्रिकेटर युवराज सिंह, ये स्टार्स भी दिखे, देखें तस्वीरें
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इन सबके अलावा परिणीति चोपड़ा भी मुंबई एयरपोर्ट पर मौजूद दिखीं।

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मुंबई एयरपोर्ट पर आज क्रिकेटर युवराज सिंह और अभिनेता शक्ति कपूर जब एक दूसरे से मिले तो किसी बिछड़े दोस्त की तरह मिले। दरअसल, दोनों अपनी फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट पहुंचे थे जहां इन दोनों का आमना-सामना हुआ। फोटोग्राफरों ने इन पलों को कैमरे में कैद कर लिया।


अभिनेता वरुण धवन भी मुंबई एयरपोर्ट पर नज़र आये। वरुण इन दिनों अपनी फ़िल्म कलंक की शूटिंग कर रहे हैं।

अभिनेत्री नुशरत भरुचा भी मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट की गयीं।

अभिनेत्री सुष्मिता सेन अपनी दोनों बेटियों और ब्वॉयफ्रेंड रोहमन शॉल संग कुछ इस अंदाज़ में दिखीं।

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इन सबके अलावा परिणीति चोपड़ा भी मुंबई एयरपोर्ट पर मौजूद दिखीं।

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अभिनेता वरुण धवन भी मुंबई एयरपोर्ट पर नज़र आये। वरुण इन दिनों अपनी फ़िल्म कलंक की शूटिंग कर रहे हैं।

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अभिनेता वरुण धवन भी मुंबई एयरपोर्ट पर नज़र आये। वरुण इन दिनों अपनी फ़िल्म कलंक की शूटिंग कर रहे हैं।

अभिनेत्री नुशरत भरुचा भी मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट की गयीं।

अभिनेत्री सुष्मिता सेन अपनी दोनों बेटियों और ब्वॉयफ्रेंड रोहमन शॉल संग कुछ इस अंदाज़ में दिखीं।

एयरपोर्ट पर शक्ति कपूर से मिले क्रिकेटर युवराज सिंह, ये स्टार्स भी दिखे, देखें तस्वीरें
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इन सबके अलावा परिणीति चोपड़ा भी मुंबई एयरपोर्ट पर मौजूद दिखीं।

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देश ग्राहक को जेब में पैसे के मुताबिक मिलेगी एलपीजी गैस, सरकार ने दिया विकल्‍प

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प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ने देश के अधिकांश गरीबों के घर में एलपीजी कनेक्शन तो पहुंचा दिया लेकिन इन गरीबों के लिए एक एलपीजी सिलेंडर के लिए 800-900 रुपये का भुगतान करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई एजेंसियों से बात की है और हाल ही में टाटा इनोवेशन ने इसका एक बेहतरीन विकल्प सरकार के सामने पेश किया है जो आने वाले दिनों में एलपीजी बिजनेस में क्रांति ला सकता है। यह सुझाव यह है कि ग्राहक को उसकी जेब के मुताबिक एलपीजी दिया जाए।

अभी 14.2 किलो का बड़ा या 5 किलो का छोटा सिलेंडर ही ग्राहकों को लेना पड़ता है लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा है तो ग्राहक जितना चाहेगा मतलब अगर वह पांच किलो चाहे तो पांच किलो और सात किलो चाहे तो सात किलो एलपीजी दिया जाएगा।

इस बात की जानकारी स्वयं पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को उज्जवला पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर दिया। उन्होंने कहा कि टाटा इनोवेशन के प्रोत्साहन से भुवनेश्वर के आइआइटी में अध्ययनरत एक छात्र ने ऐसी तकनीकी विकसित की है जिससे जो जितना चाहे उतना गैस उसे देने संभव हो सकेगा।

अब यह तेल कंपनियों के ऊपर है कि इस तकनीकी को अपनाये और इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि यह उज्जवला योजना का अगला कदम हो सकता है। हालांकि उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि क्या ग्राहकों के मौजूदा सिलेंडर में ही गैस भरने की व्यवस्था होगी या कोई दूसरी व्यवस्था होगी।

लेकिन उन्होंने यह जरुर कहा कि व्यवस्था ऐसी होगी, जिसमें तेल कंपनियों को नए गैस सिलेंडर तैयार करने की जरुरत न हो। प्रधान की घोषणा के बाद तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी तौर पर इस व्यवस्था को लागू करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर तकनीकी का इस्तेमाल करना होगा।

पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने एक दूसरा संकेत यह दिया कि आने वाले दिनों में देश में बायोमास का इस्तेमाल उज्जवला योजना के तहत दिए जाने वाले गैस सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। यह न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि यह तेल कंपनियों की लागत भी कम आएगी। दरअसल, प्रधान उज्जवला योजना के अगले चरण को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और सोच के बारे में बता रहे थे।

उस संदर्भ में उन्होंने बताया कि गांव-गांव व घर घर एलपीजी पहुंचने से बड़ी संख्या में महिलाओं के पास अतिरिक्त समय बच रहा है। तेल कंपनियों को इन महिलाओं की श्रम-शक्ति के इस्तेमाल की बड़ी योजना बनानी चाहिए। इस अवसर पर प्रधान ने आईआईएम (अहमदाबाद) के पूर्व निदेशक एस के बरुआ ने उज्जवला पर अपना अध्ययन प्रधान को भेंट किया।


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देश डिजिटल फार्मिंग से भरेगा दुनिया का पेट, बदल रही तकनीक, आधुनिक हो रहे किसान

1 Hour ago

तेजी से बढ़ती आबादी और खराब होती आबोहवा ने दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ इस बात की चिंता से दो चार हो रहे हैं कि अगर इसी तरह मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती रही, पानी की कमी होती रही या जलवायु परिवर्तन के चलते कम और खराब गुणवत्ता वाले खाद्यान्न उत्पादित होते रहे तो लोगों का कैसे पेट भरा जाए।

इसी क्रम में अब विशेषज्ञों ने ड़िजिटल फार्मिंग को इन सब मर्जों की एक दवा मानी है। उनका मानना है कि इसी तरीके से टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। स्वत: काम करने वाले रोबोट, ड्रोन, जीपीएस प्रणाली, अत्याधुनिक विज्ञान सहित दुनिया भर के किसान नई तकनीकों के इस्तेमाल से कम लागत में स्मार्ट खेती के तरीके से इस दिशा में कदम भी बढ़ा चुके हैं। भारत सहित अमेरिका, हंगरी, चीन और अफ्रीका के किसान टिकाऊ खेती के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आधुनिक किसान और कृषि शिक्षा
पुराने जमाने में खेती-किसानी को ऐसा पेशा माना जाता रहा है जिसमें वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्वत: स्थानांतरित होता जाता था। अब हालत अलहदा है। आज के किसान डिजिटल ज्ञान और कौशल से लैस हैं। पिछले 30 साल में दुनिया भर में टिकाऊ खेती को लेकर हुई खोजें महज आर्थिक लाभ लेने से नहीं हुईं बल्कि इसने कृषि को उच्च शिक्षा के दायरे में भी शामिल किया। अमेरिका के कॉलेज और विश्वविद्यालय टिकाऊ खेती के 140 कोर्स पढ़ा रहे हैं। यह बताता है कि किस तरह से युवा पीढ़ी हमारे खाद्य सिस्टम को स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने को लेकर सचेष्ट है।

धन और समय की बचत
डिजिटल तकनीक खेती और उसके तौर-तरीकों को तेजी से बदल रही है। डाटा, पूर्वानुमान का विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और समग्र खेती प्रबंधन ने किसानों का समय तो बचाया ही है, परंपरागत तौर से की जाने वाली उनकी खेती की लागत भी कम की है। इससे खेती में अप्रत्याशित सटीकता और कुशलता आई है।

तकनीक की तेजी
सेटेलाइट और ड्रोन खेतिहर किसानों को बता रहे हैं कि वे जमीनी स्तर पर अपनी फसलों का प्रबंधन कैसे करें। इनकी तस्वीरों से वे सही आकलन करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब, कैसे और किस फसल की बुआई करनी है। सेटेलाइट से एकत्र आंकड़े स्मार्ट खेती में संभावनाओं का नया द्वार खोला है।

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खेल थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन टिकेश्वरी ने कभी मनचलों को सिखाया था ऐसा सबक

1 Hour ago

दो साल पहले की बात है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्कूल से छात्रा टिकेश्वरी अपने घर लौट रही थी। साइकिल से घर जा रही छात्रा को तीन मनचलों ने रास्ते में रोका। उन्हें लगा ये नाजुक सी लड़की उनका क्या बिगाड़ पाएगी, लेकिन पलक झपकते ही दांव पलट गया और टिकेश्वरी ने तीनों मवालियों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। 16 साल की इस लड़की की बहादुरी के खूब चर्चे भी हुए थे। अब इसी लड़की ने थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में बतौर खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मैडल जीता है।

आत्मरक्षा में माहिर, लड़कियों के लिए बनीं रोल मॉडल

तीन फरवरी को गोवा में आयोजित थाई बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में टिकेश्वरी ने भारत की ही सुनीता को 3-0 से हराकर 44 किलो वजन वर्ग में वर्ल्ड टाइटल अपने नाम किया। टिकेश्वरी की कहानी संघर्ष और जीत के कई छोटे-छोटे किस्सों से बनी है। रायपुर की रहने वाली टिकेश्वरी को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह लड़की आत्मरक्षा में इस कदर माहिर है कि एक-दो नहीं बल्कि कई लड़कों को अकेले ही सबक सिखा सकती है। दो साल पहले जो घटना टिकेश्वरी के साथ हुई थी, उस पर मीडिया में भी उनकी इस हिम्मत को सराहा गया था। उस समय टिकेश्वरी लड़कियों के लिए रोल मॉडल के रूप में उभरी थीं। बचपन से ही खेलों में रूचि रखने वाली टिकेश्वरी क्रिकेट और मार्सल आर्ट की भी अच्छी खिलाड़ी हैं। टिकेश्वरी के बुलंद इरादों की बदौलत अब वह खेल के क्षेत्र में देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

मां करती हैं मजदूरी, संघर्षों से लिख रही सफलता की कहानी

टिकेश्वरी की इस सफलता में उनकी मां की भूमिका सबसे बड़ी है। इसके बाद टिकेश्वरी की लगन और कोच की मेहनत ने उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में उभारा है। 4 बहनों में सबसे बड़ी टिकेश्वरी की मां नीरा साहू आरा मिल में मजदूर करती हैं। टिकेश्वरी के पिता सुरेश साहू का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। टिकेश्वरी ने कोच अनिस मेमन के मार्गदर्शन में कराते, म्यू थाई, योग व थाई बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया है। वे राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता सहित मार्शल आर्ट की विभिन्न् ओपन प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं।

दूसरों को भी दे रहीं खेलों का प्रशिक्षण ट्रेनिंग

अक्सर लोग इस बात की शिकायत करते हैं कि पारिवारिक में आर्थिक कमजोरी की वजह से वे कोई मुकाम हासिल नहीं कर पाए, लेकिन टिकेश्वरी ने अभावों से लड़ना सीखा और अब देश में खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। रायपुर के दुर्गा कॉलेज में स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत टिकेश्वरी यहां श्री गुजराती स्कूल देवेंद्र नगर रायपुर में खेल प्रशिक्षक के तौर पर भी काम करती हैं। टिकेश्वरी का कहना है कि मैं जीवन की चुनौतियों को खेल की तरह देखती हूं। खेल के मैदान में जो संघर्ष दिखता है, उसी तरह जीवन में भी कई चुनौतियां आती हैं। इनका मुकाबला खेल भावना मन में रखकर करती हूं और आगे बढ़ने के लिए रास्ते बनते जाते हैं।


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देश शोधार्थियों को फेलोशिप में बढोत्तरी को लेकर अब नहीं करना पड़ेगा आंदोलन

1 Hour ago

शोध के लिए देश में बेहतर माहौल बनाने में जुटी सरकार ने शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर शोधार्थियों को अब आंदोलन नहीं करना होगा, बल्कि इसमें हर साल खुद ही बढोत्तरी हो जाएगी। इसे लेकर एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा। फिलहाल इसे लेकर सरकार ने वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के सचिव जीसी मुरमू की अध्यक्षता में एक दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी गठित कर दी है। जिसने अपना काम भी शुरू कर दिया है।

फेलोशिप राशि की हर साल होगी समीक्षा, चार हफ्ते में देगी रिपोर्ट

सरकार ने यह कदम फेलोशिप राशि में बढोत्तरी के हफ्ते भर के भीतर उठाया है, जिसमें फेलोशिप की राशि में करीब 35 फीसद तक बढ़ोत्तरी की गई है। हालांकि सरकार ने यह फैसला शोधार्थियों की ओर से चलाए गए लंबे आंदोलन के बाद लिया था। इस बीच गठित की गई कमेटी को चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

बनेगा मजबूत तंत्र, सरकार ने गठित की दस सदस्यीय अंतर-मंत्रालयीन कमेटी

कमेटी में जिन मंत्रालयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, उनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को इसका सह-अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा इस कमेटी में सात अन्य सदस्य भी बनाए गए है। इनमें डायरेक्टर सीएसआईआर, डायरेक्टर आईसीएआर, चेयरमैन यूजीसी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वित्त सलाहकार, जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार, आईआईटी दिल्ली के डायेक्टर प्रोफेसर वी रामगोपाल राव और सचिव यूजीसी को शामिल किया गया है।

अभी शोधार्थियों की फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी को लेकर देश को कोई भी व्यवस्था नहीं है। हाल ही में हुई यह बढ़ोत्तरी चार सालों के बाद की गई थी। शोधर्थियों की ओर से फेलोशिप राशि में बढ़ोत्तरी का सालाना आंकलन करने की भी मांग की गई थी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक फेलोशिप में बढ़ोत्तरी के जिस फार्मूले पर काम किया जा रहा है, उसके तहत शोधार्धियों के प्रदर्शन को भी जांचा जाएगा।

अभी शोध के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पंजीकृत है, जो लंबे समय से एक ही शोध में लगे है, लेकिन अभी तक कोई वह पूरा नहीं हो सका है। नई योजना के तहत शोधार्थियों अब शोध को ज्यादा लंबा लटका नहीं सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे शोध के क्षेत्र में भी तेजी आएगी।


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मनोरंजन एयरपोर्ट पर शक्ति कपूर से मिले क्रिकेटर युवराज सिंह, ये स्टार्स भी दिखे, देखें तस्वीरें

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मुंबई एयरपोर्ट पर आज क्रिकेटर युवराज सिंह और अभिनेता शक्ति कपूर जब एक दूसरे से मिले तो किसी बिछड़े दोस्त की तरह मिले। दरअसल, दोनों अपनी फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट पहुंचे थे जहां इन दोनों का आमना-सामना हुआ। फोटोग्राफरों ने इन पलों को कैमरे में कैद कर लिया।


अभिनेता वरुण धवन भी मुंबई एयरपोर्ट पर नज़र आये। वरुण इन दिनों अपनी फ़िल्म कलंक की शूटिंग कर रहे हैं।

अभिनेत्री नुशरत भरुचा भी मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट की गयीं।

अभिनेत्री सुष्मिता सेन अपनी दोनों बेटियों और ब्वॉयफ्रेंड रोहमन शॉल संग कुछ इस अंदाज़ में दिखीं।

एयरपोर्ट पर शक्ति कपूर से मिले क्रिकेटर युवराज सिंह, ये स्टार्स भी दिखे, देखें तस्वीरें
एयरपोर्ट पर शक्ति कपूर से मिले क्रिकेटर युवराज सिंह, ये स्टार्स भी दिखे, देखें तस्वीरें

इन सबके अलावा परिणीति चोपड़ा भी मुंबई एयरपोर्ट पर मौजूद दिखीं।

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कारोबार फर्जी बिल के आधार पर न लें टैक्स छूट, भरना पड़ सकता है इतना जुर्माना

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चालू वित्त वर्ष 2018-19 में टैक्स भरने का समय नजदीक आ गया है। कई लोग टैक्स से बचने के लिए फर्जी बिल लगा देते हैं। लेकिन अगर कभी आप पकड़े जाते हैं तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

कई सारे ऐसे खर्चे हैं, जिसे दिखाकर कोई भी कर्मचारी अपने इंप्लॉयर से Reimbursement का दावा कर सकता है। जिनमें सबसे कॉमन मेडिकल बिल्स, और लीव ट्रेवल अलाउंस (LTA) बिल्स है। आपको बता दें कि ट्रेन और फ्लाइट से सफर करने पर इसका दावा किया जा सकता है।

आप जो घर का किराया देते हैं उसपर भी राहत मिलती है। लेकिन जब आप 1 लाख रुपये से अधिक का किराया भरते हैं तो मकान मालिक का पैन कार्ड आपको देना होगा।

एक बात ध्यान रखिये, अगर आपने अपनी आय छुपाई है या कम दिखाई है तो आईटी एक्ट के सेक्शन 270A(1) के तहत 50 फीसद तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। हालांकि अगर आपने अपनी आय को कम दिखाने के अलावा गलत तरीके से दिखाया है तो जुर्माने की राशि बढ़कर 200 फीसद तक हो सकती है। अपने पेमेंट के लिए आप नेट बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करें। इससे खर्च का प्रमाण देना आसान हो जाएगा। 

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कारोबार SBI Small Account: कैसे खुलता है ये खाता, कितना मिलता है ब्याज, जानिए सब कुछ

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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) स्माल अकाउंट खोलने का विकल्प देता है। स्माल अकाउंट कोई भी व्यक्ति खोल सकता है जिसकी उम्र 18 साल है से ज्यादा है। हम इस खबर में एसबीआई स्माल अकाउंट से जुड़ी कुछ जानकारी दे रहे हैं।

  • एसबीआई का स्माल अकाउंट को सिंगल, जॉइंट या कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है खोल सकता है।
  • एसबीआई के सेविंग अकाउंट के उलट स्माल अकाउंट में औसत न्यूनतम शेष राशि (एएमबी) रखने की जरूरत नहीं है।
  • एसबीआई के स्माल अकाउंट की ब्याज दरें नियमित सेविंग अकाउंट खातों के समान हैं।
  • स्माल अकाउंट में अधिकतम शेष राशि 50,000 रुपये रखी जा सकती है।
  • इसमें ग्राहकों को बेसिक RuPay एटीएम-कम-डेबिट कार्ड भी मुफ्त मिलता है और SBI के स्माल अकाउंट के लिए कोई वार्षिक रखरखाव शुल्क नहीं देना होता है। एनईएफटी/आरटीजीएस जैसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट भी मुफ्त है।
  • खाताधारकों को एक महीने में अधिकतम चार निकासी की अनुमति है, जिसमें खुद के और अन्य बैंक के एटीएम से निकासी शामिल है। बैंक की वेबसाइट के अनुसार, खाता बंद करने के लिए भी कोई शुल्क नहीं लगता है।
  • यदि केवाईसी दस्तावेज़ 24 महीने के भीतर स्माल अकाउंट वाले बैंक को नहीं दिए जाते हैं, तो खाते को बंद करने के अलावा किसी भी लेनदेन की अनुमति नहीं है।
  • एसबीआई के स्माल अकाउंट को केवाईसी दस्तावेज जमा करने पर नियमित सेविंग अकाउंट में बदला जा सकता है।

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खेल Ind vs NZ: हार्दिक पांड्या ने फिर किया ये कमाल, छुड़ा दिए न्यूज़ीलैंड के पसीने

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भारत और न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पांचवें वनडे मैच में हार्दिक पांड्या मे ताबड़तोज़ पारी खेली। इस मैच में जब ज़्यादातर भारतीय दिग्गज़ बल्लेबाज़ों ने अपने फैंस को निराश किया और टीम इंडिया को मुश्किल स्थिति में पहुंचाया वहीं पांड्या उन कुछ में बल्लेबाज़ रहे जिन्होंने टीम को मुश्किलों से उबारा। इस मैच में पांड्या अंबाती रायुडू के आउट होने के बाद बल्लेबाज़ी करने आए और उन्होंने आते ही धमाकेदार शॉट्स खेलने शुरू कर दिया। पांड्या ने भारतीय पारी में एक फिनिशर की भूमिका निभाते हुए 18 गेंदों में नाबाद 45 रन की पारी खेली। इस पारी में उन्होंने दो चौके और पांच छक्के भी जड़े।

एक ओवर में जड़े तीन छक्के 

इस बेहतरीन पारी के दौरान पांड्या ने 47वें ओवर में टॉड एस्टल की तीन गेंदों पर लगातार तीन छक्के जड़े। इस ओवर की पहली गेंद पर उन्होंने डिफेंस किया। इसके बाद पांड्या ने दूसरी, तीसरी और चौथी गेंद पर बैक टू बैक तीन छक्के जड़ दिए। आपको बता दें कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब पांड्या ने वनडे क्रिकेट में एक ओवर में लगातार तीन छक्के जड़े हों। इससे पहले 2017 में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भी पांड्या ने पाक्स्तान के खिलाफ लगातार तीन गेंदों पर तीन छक्के जड़े थे। हार्दिक पांड्या ने पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भारत की पारी के 23वें ओवर में शादाब खान की तीन गेंदों पर तीन दमदार छक्के लगाए और इस ओवर में 23 रन बटोरे।

आपको याद दिला दे कि चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट में जब भारतीय टीम लीग मैच में पाकिस्तान से भिडी थी उस मैच में भी हार्दिक पांड्या ने लगातार तीन छक्के जड़े थे। उस मैच में भारतीय पारी के 50वें ओवर में पांड्या ने ये कमाल किया था।


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खेल Ind vs NZ: बुरे वक्त में अंबाती रायुडू ने टीम के लिए खेली बेहतरीन पारी पर शतक से चूके

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न्यूजीलैंड के खिलाफ जिस मुश्किल स्थिति में अंबाती रायुडू ने अपने बल्ले का दम दिखाया उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। हालांकि वो अपने शतक से 10 रन से चूक गए लेकिन उनकी पारी ने भारीतय टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अपनी इस पारी से रायडू ने जता दिया कि वो मध्यक्रम में भारतीय टीम के लिए कितने उपयोगी बल्लेबाज हैं। 

113 गेंदों पर 90 रन बनाए अंबाती रायुडू ने

भारतीय टीम के चार अहम बल्लेबाज रोहित शर्मा (02), शिखर धवन (06), शुभमन गिल (07)  और धौनी (01) सस्ते में आउट होकर पवेलियन लौट गए। ऐसे विषम स्थिति में अंबाती ने अपना दम दिखाया और 113 गेंदों का सामना करते हुए 90 रन बनाए। उन्होंने शुरू में काफी धीमी बल्लेबाजी की लेकिन बाद में उन्होंने जबरदस्त शॉट्स लगाए। हालांकि अंबाती को एक जीवनदान भी मिला। अपनी पारी में उन्होंने 8 चौके और 4 शानदार छक्के लगाए।

अंबाती ने की शानदार साझेदारी 

रायुडू ने भारतीय पारी को संभालने का काम बखूबी किया। उन्होंने विजय शंकर के साथ पांचवें विकेट के लिए 98 रन की साझेदारी की। शंकर ने भी टीम के लिए 45 रन का बेहतरीन योगदान किया। इसके बाद अंबाती ने छठे विकेट के लिए केदार जाधव के साथ मिलकर 74 रन की पारी खेली। उनकी पारी का अंत हेनरी ने किया और उनका कैच मुनरो ने लपका।

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फैशन और अंदाज

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Real Brides: इनके सामने बॉलीवुड की एक्ट्रेसेस भी हैं फ्लॉप

1 Hour ago

हाल ही में अनुष्का शर्मा और सागरिका घाटगे दोनों ही अपनी शादियों में डिज़ाइनर सब्यासाची आउटफिट में दिखीं थीं. इनके अलावा भी कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेस ने अपनी शादियों में सब्यासाची, अनिता डोंगरे, मनीष मल्होत्रा के डिज़ाइनर लहंगे पहनें थे. लेकिन आज यहां आपको उन रियल ब्राइड्स से मिलवा रहे हैं जिन्होंने अपनी शादियों में डिज़ाइनर लहंगे पहने. इनके लुक्स को देखकर आपको भी यह अहसास होगा कि इनके आगे बॉलीवुड की एक्ट्रेसेस भी फेल हैं.

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