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गूगल डूडल ने सोवियत के भौतिकविद लेव को ऐसे किया याद

वॉशिंगटन। गूगल ने मंगलवार को प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी लेव डेविडोविच लांडौ को उनकी 111 वीं जयंती पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी। वह 1962 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले वैज्ञानिक हैं, जिन्हें सुपरफ्लूडिटी के लिए मैथेमैटिकल थ्योरी के लिए यह सम्मान मिला था। उनका जन्म 22 जनवरी 1908 को अजरबेजान के बाकू में हुआ था।

उनके प्रमुख शोध में इंडिपेंडेंट को-डिस्कवरी ऑफ द डेंसिटी मैट्रिक्स मैथड, क्वांटनम मैकेनिकल थ्योरी ऑफ डायमैग्नेटिज्म, द थ्योरी ऑफ सुपरफ्लूडिटी, द थ्योरी ऑफ सेकंड फेज ट्रांजिशन्स, द थ्योरी ऑफ फर्मी लिक्विड आदि थीं। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।

उन्होंने 12 साल की उम्र में डिफ्रेंशिएट, 13 साल की उम्र में इंटीग्रेट, जिमनेजिमय में 13 साल की उम्र में ग्रेजुएट किया और 15 साल की उम्र में बाकू स्टेट यूनिवर्सिटी से मैट्रीकुलेटेड किया था। यहां एक साथ वह डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स और मैथेमेटिक्स व डिपार्टमेंट ऑफ केमेस्ट्री में पढ़ रहे थे।

19 वर्ष की आयु में लेनिनग्राद विश्वविद्यालय के भौतिक विभाग से स्नातक होने के बाद, उन्होंने लेनिनग्राद फिजिको-तकनीकी संस्थान में अपना वैज्ञानिक कैरियर शुरू किया। इसके बाद वह साल 1930 में नील्स बोर्स इंस्टीट्यूट फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स में काम करने के लिए कोपनहेगन गए थे।

वह एक शिक्षित परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता स्थानीय ऑयल इंडस्ट्री में इंजीनियर थे और उनकी मां डॉक्टर थीं। एक कार एक्सीडेंट में लगी चोट के कारण छह साल बाद 60 साल की उम्र में एक अप्रैल 1968 में उनका निधन हो गया था।


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